Rahul Upadhyaya
Poet • Engineer • Visionary
Binary and Ballads.
जड़ों से प्रवास तक
मध्यप्रदेश के शिवगढ़, जिला रतलाम, में जन्मे राहुल उपाध्याय की जीवन यात्रा किसी रोमांचक कथा से कम नहीं है। पिछले 40 वर्षों से अमेरिका के विभिन्न शहरों को अपना कर्मक्षेत्र बनाने वाले राहुल, आज एक सफल इंजीनियर और एक गहन साहित्यकार के रूप में पहचाने जाते हैं।
तकनीक और हृदय का संगम
पिछले दो दशकों से अधिक समय से सिएटल में माइक्रोसॉफ्ट की इंजीनियरिंग टीम का हिस्सा होने के बावजूद, राहुल ने अपनी साहित्यिक चेतना को कभी मंद नहीं होने दिया। उनकी इंजीनियरिंग की तार्किकता और साहित्य की भावुकता का संलयन उनकी लेखनी को एक अनूठा दृष्टिकोण प्रदान करता है।
कबीर का प्रभाव
राहुल की लेखनी के केंद्र में महाकवि कबीर का दर्शन समाया हुआ है। कबीर की सादगी और निर्भीक अभिव्यक्ति ने उन्हें प्रेरित किया है कि वे प्रवासी जीवन के उन अनकहे द्वंद्वों को स्वर दें, जिन्हें अक्सर समाज अनदेखा कर देता है।
रंगमंच और अभिनय
साहित्य और तकनीक के अलावा, राहुल एक मंझे हुए अभिनेता भी हैं। सिएटल के रंगमंच पर उन्होंने दो अंग्रेज़ी नाटकों में प्रमुख भूमिकाएं निभाई हैं, जो उनकी बहुआयामी प्रतिभा को सिद्ध करती हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
आय-आय-टी वाराणसी से धातुकीय अभियांत्रिकी में स्नातक और अमेरिका के प्रतिष्ठित संस्थान से एम-बी-ए (सूचना प्रणाली) की उच्च शिक्षा प्राप्त करना उनके बौद्धिक धरातल को मजबूत बनाता है।
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Whether it's a discussion on Hindi literature, the intricacies of tech, or the dilemmas of the diaspora, I'm always open to a meaningful conversation.
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