Poetic Collections
Dive into the lyrical explorations of identity and home, curated for those who seek meaning in the mundane.
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Praise & Reflections
"इन कविताओं से गुजरते हुए बाबा नागार्जुन की कविताओं की सोंधी महक और जन-सरोकार सहज ही याद आ जाते हैं। विदेश में रहकर भी अपनी जड़ों और भाषा के प्रति ऐसा लगाव वाकई प्रेरणादायक है।"
डॉ आत्माराम शर्मा
सम्पादक “गर्भनाल”
भोपाल
"राहुल उपाध्याय ने सन् 1999 से काव्य लेखन यात्रा शुरू की और आज तक लगभग ढाई हजार से अधिक कवितायें लिखीं हैं जो जीवन के हर पहलू को साफ-साफ बयान करती हैं, बिलकुल एक आईने की तरह।"
मनीष पाण्डेय ‘मनु’
कवि, लेखक एवं सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ
एम्स्टरडैम, नीदरलैंड्स
"अपनी सरलता और सहजता से ब्लॉग 'मेयर वर्ड्स' को सचमुच 'मेरे वर्ड्स' बना लेने वाले राहुल उपाध्याय को इस पुस्तक के प्रकाशन पर ढेर सारी बधाई। उनकी कविता में दर्द है, पर साथ ही धीरज और करुणा भी है।"
अभिनव शुक्ल
कवि एवं सहयात्री
ऑस्टिन
"जीवन की उधेड़-बुन में कुछ उलझी कुछ सुलझी यादों को समेटे आपकी अद्वितीय पुस्तक के लेखन हेतु आपको दिल से साधुवाद तथा असंख्य बधाइयाँ।"
प्रमिला कौशिक
कवयित्री, शिक्षाविद
दिल्ली