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© 2026 Rahul Upadhyaya. All rights reserved.

Poet • Engineer • Visionary

Binary and
Ballads.

Microsoft engineer by day, poet by heart. Join Rahul Upadhyaya as he explores the intricate duality of technology and the soul, capturing the poignant dilemmas of the global Indian experience.

1 Published Work
500+ Verses

Unfolding the duality of the soul...

प्रवासी मन की द्वंद्व और दुविधाएँ,
कविताओं में सिमटी अनकही कहानियाँ।

Verses from the Heart

Poetic Collections

Dive into the lyrical explorations of identity and home, curated for those who seek meaning in the mundane.

Our collection is currently being curated. Check back soon.

Voices of Readers

Praise & Reflections

"इन कविताओं से गुजरते हुए बाबा नागार्जुन की कविताओं की सोंधी महक और जन-सरोकार सहज ही याद आ जाते हैं। विदेश में रहकर भी अपनी जड़ों और भाषा के प्रति ऐसा लगाव वाकई प्रेरणादायक है।"

डॉ आत्माराम शर्मा

सम्पादक “गर्भनाल”

भोपाल

"राहुल उपाध्याय ने सन् 1999 से काव्य लेखन यात्रा शुरू की और आज तक लगभग ढाई हजार से अधिक कवितायें लिखीं हैं जो जीवन के हर पहलू को साफ-साफ बयान करती हैं, बिलकुल एक आईने की तरह।"

मनीष पाण्डेय ‘मनु’

कवि, लेखक एवं सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ

एम्स्टरडैम, नीदरलैंड्स

"अपनी सरलता और सहजता से ब्लॉग 'मेयर वर्ड्स' को सचमुच 'मेरे वर्ड्स' बना लेने वाले राहुल उपाध्याय को इस पुस्तक के प्रकाशन पर ढेर सारी बधाई। उनकी कविता में दर्द है, पर साथ ही धीरज और करुणा भी है।"

अभिनव शुक्ल

कवि एवं सहयात्री

ऑस्टिन

"जीवन की उधेड़-बुन में कुछ उलझी कुछ सुलझी यादों को समेटे आपकी अद्वितीय पुस्तक के लेखन हेतु आपको दिल से साधुवाद तथा असंख्य बधाइयाँ।"

प्रमिला कौशिक

कवयित्री, शिक्षाविद

दिल्ली